सोमवार, 29 जून 2009

" उमर वो बचपन की "




" उमर वो बचपन की "



अब क्या भूलूं क्या याद करूँ ,
लौटेगी उमर वो बचपन की ,
वक्त से चाहे जितनी विनती-फरियाद करूँ ||
माँ का गुस्सा , दीदी की मनुहार ,
दद्दा का इकरार , बाबूजी का प्यार,
भूले-भटके मिलते थे कभी-कभी ,
माँ नरम ,बाबूजी गरम ,दीदी चि़ड़चिड़,दद्दा के तेवर ,
ब्याज में भौजाई से तकरार जमा-पूंजी यही बचपन की,
वो सब रह-रह याद करूँ उम्र जो गुज़री पचपन की ||
अब क्या भूलूं क्या याद करूँ ,
लौटेगी उमर वो बचपन की ,
वक्त से चाहे जितनी विनती-फरियाद करूँ ||






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4 टिप्पणियाँ:

alka sarwat 1 जुलाई 2009 को 3:56 pm  

बचपन की उम्र कभी लौटती नहीं
वो गाना नहीं सुना आपने
ये दौलत भी ले लो ये शोहरत भी ले लो
भले छीन लो मुझसे मेरी जवानी
मगर मुझ को लौटा दो ...........
वो कागज़ की किश्ती वो बारिश का पानी

अमिताभ श्रीवास्तव 1 जुलाई 2009 को 7:37 pm  

jo beet gayaa so beet gaya..
pyaar mohabbat reet gayaa..
kya bhoolu kyaa yaad karoo..
chalo gaao ab ek geet nayaa//

'अदा' 4 जुलाई 2009 को 8:50 pm  

माँ नरम ,बाबूजी गरम ,दीदी चि़ड़चिड़,दद्दा के तेवर ,
ब्याज में भौजाई से तकरार जमा-पूंजी यही बचपन की,
वो सब रह-रह याद करूँ उम्र जो गुज़री पचपन की ||

बस यही रह जाती है जमा-पूँजी...
और हम जीते चले जाते हैं, इनके साथ..
बहुत ही सार्थक रचना, मन में रच-बस गयी है यह...

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हर व्यक्ति अपने मन के ' गुबारों 'से घुट रहा है ,पढ़े लिखे लोगों के लिए ब्लॉग एक अच्छा माध्यम उपलब्ध है
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हर एक मन कविमन होता है , हर एक के अन्दर एक कथाकार या किस्सागो छुपा होता है | हर व्यक्ति एक अच्छा समालोचक होता है \और सभी अपने इर्दगिर्द एक रहस्यात्मक आभा-मंडल देखना चाहतें हैं ||
एक व्यक्तिगत सवाल ? इमानदार जवाब चाहूँगा :- क्या आप सदैव अपनी इंटीलेक्चुएलटीज या गुरुडम लादे लादे थकते नहीं ?

क्या आप का मन कभी किसी भी व्यवस्था के लिए खीज कर नहीं कहता
............................................

"उतार फेंक अपने तन मन पे ओढे सारे भार ,
नीचे हो हरी धरती ,ऊपर अनंत नीला आकाश,
भर सीने में सुबू की महकती शबनमी हवाएं ,
जोर-जोर से चिल्लाएं " हे हो , हे हो ,हे हो ",
,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,
फिर सुनते रहें गूंज अनुगूँज और प्रति गूंज||"

मेरा तो करता है : और मैं कर भी डालता हूँ

इसे अवश्य पढें " धार्मिकता एवं सम्प्रदायिकता का अन्तर " और पढ़ कर अपनी शंकाएँ उठायें ;
इस के साथ कुछ और भी है पर है सारगर्भित
बीच में एक लम्बा अरसा अव्यवस्थित रहा , परिवार में और खानदान में कई मौतें देखीं कई दोस्त खो दिये ;बस किसी तरीके से सम्हलने की जद्दोजहद जारी है देखें :---
" शब्द नित्य है या अनित्य?? "
बताईयेगा कितना सफल रहा |
हाँ मेरे सवाल का ज़वाब यदि आप खुले - आम देना न चाहें तो मेरे इ -मेल पर दे सकते है , ,पर दें जरुर !!!!



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