" मेरे शब्दों की पूंजी तेरे पास होगी ,"
" अपना क्या "
अपना क्या ' ज़िन्दगी ',की शाम हुयी उम्र यूँ ही तमाम हुयी , ज्यूँ सूरज डूबेगा त्यों ही रूह उसके नाम हुयी, मुक्त हुआ मैं इस एकान्तिक अभिशाप से , पर रखना यकीं फिर आऊंगा , रूप बदल जायेगा ? पहचान पाओगी ? तब तुम्हे कोई इन्द्रधनुषी गीत सुनाऊंगा , आऊंगा और शब्दों की सृष्टि पुनः पुनः रचाऊंगा, मेरे शब्दों की पूंजी तेरे पास होगी , जब मांगू दे देना वरना , फिर से अभिशप्त हो जाऊंगा !!!फिर से अभिशप्त हो जाऊंगा
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