"मेरा यक्ष-प्रश्न "
राम क्यों आक्षेपित बार बार करते हो राम को ? कुपुत्र कहलाते जो वन ना जाते लेते न जो अग्नि-परीक्षा ,धर्म विरुद्ध तुम ही कहते ! धोबी के वचन को भरी सभा जो मर्म न देते , मात्र रघुवंशी चक्रवर्ती साम्राट राम तुम ही कहते | क्या बार-बार के उन्ही आक्षेपों की है ग्लानि यह ? जो अयाचित, राम को मर्यादा पुरुषोत्तम कहते हो और भी आगे बढ,राम को भगवान के सिंहासन पर बैठाते हो || कोई मेरे इस यक्ष-प्रश्न का उत्तर भी दे पायेगा , क्या ? राम सी मर्यादा किसी और ने भी निभाई है?
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