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गुरुवार, 6 नवंबर 2008

" चाँद मुसाफिर "

अन्य ब्लागरों के ब्लॉग पर किए कमेंट्स के संग्रह में से कुछ पुष्प अब आप की 'टिप्पणियों ' हेतु आप के समक्ष प्रस्तुत हैं -----------

लम्हा :लम्हा

"समर" मुस्कुराती रहे यूँ ही जिंदगी कभी कभी ;

यारां कभी न ओढ़ना, साये गम -ओ -उदासियों के ,

वक्त ए दौरां से ही चुरा लाईये खुशियों के कुछ पल;

लम्हा -लम्हा सही , जीलेंगें ज़िन्दगी कभी कभी \\

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"समर" सहर हो कैसे मावस की रातों ,

ठिठुर ठहरा जो चाँद मुसाफिर ;

चांदनी - तन्हाई दोनों हुईं साकी ,

ठहर चाँद हुआ जो हम-प्याला;

यूँ लम्बी हुईं जाडों में मावस कि रातें ,

आईये जाम यादों के छलकाईये

जग देखी औरों की तो चाँद कहेगा ,

आप तो फ़क़त अपनी सुनाईये ||

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रूबरू ; संवेदना है /

मौन : सांत्वना है

स्पर्श : सुकूं है /

शब्द : रुदन है =??? : आँसू हैं /

मुस्कान : इबादत है /

हँसी : समर्पण है/

मिलन : ब्रह्म है

जो असीमित है : अनन्त है !!!!!??????\/

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अपना ये दर्द ही तो हम जीते हैं,

आज तक सुकूं को जी सका है कौन ?

सुकूं जो जी रहे ,कब्रों में सोते है मौन

?_________________________???

"समर" औरों के दर्द का एहसास ,

अपने दिलों में भी जगाईये ;

गोयाकि बनिएगा मत मसीहा

फ़क़त रहबर का फ़रायज़ निभाईए ||




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Translation

" उन्मुक्त हो जायें "



हर व्यक्ति अपने मन के ' गुबारों 'से घुट रहा है ,पढ़े लिखे लोगों के लिए ब्लॉग एक अच्छा माध्यम उपलब्ध है
और जब से इन्टरनेट सेवाएं सस्ती एवं सर्व - सुलभ हुई और मिडिया में सेलीब्रिटिज के ब्लोग्स का जिक्र होना शुरू हुआ यह क्रेज और बढा है हो सकता हैं कल हमें मालूम हो कि इंटरनेट की ओर लोगों को आकर्षित करने हेतु यह एक पब्लिसिटी का शोशा मात्र था |

हर एक मन कविमन होता है , हर एक के अन्दर एक कथाकार या किस्सागो छुपा होता है | हर व्यक्ति एक अच्छा समालोचक होता है \और सभी अपने इर्दगिर्द एक रहस्यात्मक आभा-मंडल देखना चाहतें हैं ||
एक व्यक्तिगत सवाल ? इमानदार जवाब चाहूँगा :- क्या आप सदैव अपनी इंटीलेक्चुएलटीज या गुरुडम लादे लादे थकते नहीं ?

क्या आप का मन कभी किसी भी व्यवस्था के लिए खीज कर नहीं कहता
............................................

"उतार फेंक अपने तन मन पे ओढे सारे भार ,
नीचे हो हरी धरती ,ऊपर अनंत नीला आकाश,
भर सीने में सुबू की महकती शबनमी हवाएं ,
जोर-जोर से चिल्लाएं " हे हो , हे हो ,हे हो ",
,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,
फिर सुनते रहें गूंज अनुगूँज और प्रति गूंज||"

मेरा तो करता है : और मैं कर भी डालता हूँ

इसे अवश्य पढें " धार्मिकता एवं सम्प्रदायिकता का अन्तर " और पढ़ कर अपनी शंकाएँ उठायें ;
इस के साथ कुछ और भी है पर है सारगर्भित
बीच में एक लम्बा अरसा अव्यवस्थित रहा , परिवार में और खानदान में कई मौतें देखीं कई दोस्त खो दिये ;बस किसी तरीके से सम्हलने की जद्दोजहद जारी है देखें :---
" शब्द नित्य है या अनित्य?? "
बताईयेगा कितना सफल रहा |
हाँ मेरे सवाल का ज़वाब यदि आप खुले - आम देना न चाहें तो मेरे इ -मेल पर दे सकते है , ,पर दें जरुर !!!!



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