बुधवार, 8 जुलाई 2009

" सुनो ध्यान लगाय जो रहा ''बताऊँ'',"



"हाय-बताऊँ "

कहत कबीरा सुनो भाई साधो ,
छोड़ कमंडल लकुटिया माला ,
सुनो ध्यान लगाय जो रहा ''बताऊँ'',
दरबारे अकबरी रहा बैठा -ठाला,
मुग़ल--आज़म चढ़ तख्त बैठल उदास ,
भूला रहे सबै दरबारी लेहऊँ स्वास ,
बस अकबरै भरें -रह निस्वास ,
कहैं कहाँ हौ बीरबल जल्दी आवा पास,
जल्दी आवा पास और नाही कौनो आस,
वैद हकीम ज्ञानी ओझा गुनिया सबै हेराने,
दरबार परवेसे बीरबल तभई,
झुक-झुक किहिन हाकिम का अदब-जुहार ,
अबहिन तक रहेओ कहां लगी डपट फटकार,
लगी डपट फटकार ,फ़िर किहिन अदब-जुहार ,
बोले बीरबल हाल इह किहिस ''बताऊँ''हुजुर सरकार,
आज पालकी चढ़ हियाँ आयेन पहली बार ,
राहे न दीन्ही न लीन्ही कोऊ कै कई राम-जुहार ,
हमार पूछौ न बस कैसन हाल रहा हुजुर सरकार ?
????
???
??
?
[अन्तराल : अंतराल : अंतराल ]









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3 टिप्पणियाँ:

'अदा' 9 जुलाई 2009 को 4:38 am  

जेबा से कि ना अब इ अंतरालवा कब ख़तम होई.... ?

mastkalandr 21 जुलाई 2009 को 1:15 pm  

http://www.youtube.com/watch?v=jRVEKxCylKw

This is my latest upload on youtube.bataiyega kaisa laga video..,lyrics aur infro. ke liye is video ko youtube pr dekhiyega.
blog pr comments ke liye shukriya.
aapne sahi pehchana wo pic.babita ka hi hai..,main ne kalpna ki.ki suman ji aisi hi dikhti hongi jawaani mein isliye wo pic.wahan hai..,aap youtube par mere uploaded gaane zaroor dekhiyega..
kuchh dino pahle upload kiya hua gana nai manzil nai rahen..
(1st. time on youtube)hemant da and lata ji ka gaya hua isko sangeet premiyon ne khuub saraha .., comments zaroor dekhiyega. mastkalandr

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" उन्मुक्त हो जायें "



हर व्यक्ति अपने मन के ' गुबारों 'से घुट रहा है ,पढ़े लिखे लोगों के लिए ब्लॉग एक अच्छा माध्यम उपलब्ध है
और जब से इन्टरनेट सेवाएं सस्ती एवं सर्व - सुलभ हुई और मिडिया में सेलीब्रिटिज के ब्लोग्स का जिक्र होना शुरू हुआ यह क्रेज और बढा है हो सकता हैं कल हमें मालूम हो कि इंटरनेट की ओर लोगों को आकर्षित करने हेतु यह एक पब्लिसिटी का शोशा मात्र था |

हर एक मन कविमन होता है , हर एक के अन्दर एक कथाकार या किस्सागो छुपा होता है | हर व्यक्ति एक अच्छा समालोचक होता है \और सभी अपने इर्दगिर्द एक रहस्यात्मक आभा-मंडल देखना चाहतें हैं ||
एक व्यक्तिगत सवाल ? इमानदार जवाब चाहूँगा :- क्या आप सदैव अपनी इंटीलेक्चुएलटीज या गुरुडम लादे लादे थकते नहीं ?

क्या आप का मन कभी किसी भी व्यवस्था के लिए खीज कर नहीं कहता
............................................

"उतार फेंक अपने तन मन पे ओढे सारे भार ,
नीचे हो हरी धरती ,ऊपर अनंत नीला आकाश,
भर सीने में सुबू की महकती शबनमी हवाएं ,
जोर-जोर से चिल्लाएं " हे हो , हे हो ,हे हो ",
,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,
फिर सुनते रहें गूंज अनुगूँज और प्रति गूंज||"

मेरा तो करता है : और मैं कर भी डालता हूँ

इसे अवश्य पढें " धार्मिकता एवं सम्प्रदायिकता का अन्तर " और पढ़ कर अपनी शंकाएँ उठायें ;
इस के साथ कुछ और भी है पर है सारगर्भित
बीच में एक लम्बा अरसा अव्यवस्थित रहा , परिवार में और खानदान में कई मौतें देखीं कई दोस्त खो दिये ;बस किसी तरीके से सम्हलने की जद्दोजहद जारी है देखें :---
" शब्द नित्य है या अनित्य?? "
बताईयेगा कितना सफल रहा |
हाँ मेरे सवाल का ज़वाब यदि आप खुले - आम देना न चाहें तो मेरे इ -मेल पर दे सकते है , ,पर दें जरुर !!!!



कदमों के निशां

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