रविवार, 14 जून 2009

" काश मैं भी हो पता नीलकंठ "



" काश मैं भी हो पता नीलकंठ "



कोशिश कर कभी सुनना विरानो के गीत ,
तन्हाई की सिसकियां भी होंगी ऐ अनजाने मीत !

खामोशी का संगीत जब भी आप गुनगुनायेंगे ,
लय की लरज़ में मुझे ही अकेला खडा पायेगे !

अपनी हर हर नज्म में ,कर्ण की रुसवाई को जीता हुआ
मुझे ही पायेंगें ,भीष्म की तन्हाईयों का विष पीता हुआ!

घायल
रूहों का कारवां लिए,काँधे पे उठाये उम्मीदों का सलीब ;
सत्य-आग्रही गाँधी मैं हुआ नही, ,कहाँ से लाता ईसा सा नसीब !!

इस धरा की सारी रुसवाई : तनहाई का विष मैं पी जाता : जी जाता :
मैं भी होता अगर नीलकंठ ,
हो पाता मैं भी काश नीलकंठ !!
हो पाता मैं भी काश नीलकंठ !! मैं भी काश नीलकंठ!!
मैं भी नीलकंठ !!








यह
पूर्व प्रकाशित कविता आप के समक्ष कुछ संशोधनों के साथ पुनः प्रस्तुत है,पुरानी हटा दी गई है


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मंगलवार, 26 मई 2009

आंसू और तनहाई




आंसू और तनहाई

याराँ वो तो बेवफा हुआ,

गम में जो आँसू ,

आँखों से जुदा हुआ,

ये रिश्ता हों ,

ना रुसवा,

इसीलिएतो लोग,

अकेले में ही रोते हैं ||

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सोमवार, 25 मई 2009

" सफर के बीच "



" ज़िन्दगी की नियति  "
===
="भटकन ~ थकन ~ मंजिल ~ चलना:सफर "

'भटकन
होगी लम्बी वक़्त की रहगुज़र भी ,
लम्बी मिलेगी जितनी ज़िन्दगी ,
भटकने:ढूँढने के खेल के
रोमांस रोमांच में
कब कैसे गुज़रा वक़्त ?
खुद वक़्त ही नहीं जान पाता

थकन
जब-जब थक जाईए ,
रूकइए सुस्ताइए ,
अपनी यादों की छाँव में ,
जरा सोचिये भी ,
क्या -क्या ले कर थे निकले ,
उम्र के इस छोर आने तक ,
क्या खोया क्या पाया ,
रिश्तों को कौन
सहेज सका , कितना ,
खुद मैं भी जी पाया ,
गोया कि सफ़र अभी है बाकी|






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मंगलवार, 19 मई 2009

" ज़िन्दगी-ज़िन्दगी- ज़िन्दगी "

ज़िन्दगी




ढूँढ ले अपनी मंजिल कोई ,

यारा कर दे शुरू सफ़र अपना;


ज़िंदगी की इस राह-गुज़र पर,

मिले कभी कई क़ाफिले होंगें


कभी शब-ए-बियाँबां बसर होगा,

गुलज़ार वतन भी होंगें ;


गुल होंगे तो ख्वार भी होंगे

धूप होगी तो छावं भी होगी ,


सपनों का शहर होगा ;

ख्वाहिशों का म-क़बर होगा;


इसी ज़ुस्तजु-ए-मंजिल का

नाम ही तो ज़िन्दगी है |

kabeeraa

{ -क़बर=क़ब्रिस्तान, जुस्तजू= तलाश या खोज ,ख्वार=कांटे=दुःख,तक़लीफें, शब=रात }






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रविवार, 15 मार्च 2009

,"रात यूं वीरान अँधेरी है"


,"रात यूं वीरान अँधेरी है"
"ये खामोशी जीने दो "
शुक्र खुदा ' हर रात यूं वीरान अँधेरी है ',
कहते है दर्द से दर्द को राह सुकूँ होती है !

सिसकियाँ दूर तक सुनी जाती हैं विरानो में ,
श्श्श्श....रात को अपनी ये खामोशी जीने दो !

हर गम ए दिल के दर्द ए गम को राह पाने दो ,
न हो नासूर हर घाव,हर ज़िन्दगी आतिश-फशां !

पर रोते चेहरे भी हों न जाएँ रुसवा ,बेगानों में ,
इसी लिए हर रात वीरानी है हर रात अँधेरी है !!!

श्श्श्श....रात को अपनी ये खामोशी जीने दो !
[ आतिश -फशां = ज्वालामुखी = volcano]

पुनःप्रकाशित




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" रोमन[अंग्रेजी]मेंहिन्दी-उच्चारण टाइप करें: नागरी हिन्दी प्राप्त कर कॉपी-पेस्ट करें "

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विजेट आपके ब्लॉग पर

TRASLATE

Translation

" उन्मुक्त हो जायें "



हर व्यक्ति अपने मन के ' गुबारों 'से घुट रहा है ,पढ़े लिखे लोगों के लिए ब्लॉग एक अच्छा माध्यम उपलब्ध है
और जब से इन्टरनेट सेवाएं सस्ती एवं सर्व - सुलभ हुई और मिडिया में सेलीब्रिटिज के ब्लोग्स का जिक्र होना शुरू हुआ यह क्रेज और बढा है हो सकता हैं कल हमें मालूम हो कि इंटरनेट की ओर लोगों को आकर्षित करने हेतु यह एक पब्लिसिटी का शोशा मात्र था |

हर एक मन कविमन होता है , हर एक के अन्दर एक कथाकार या किस्सागो छुपा होता है | हर व्यक्ति एक अच्छा समालोचक होता है \और सभी अपने इर्दगिर्द एक रहस्यात्मक आभा-मंडल देखना चाहतें हैं ||
एक व्यक्तिगत सवाल ? इमानदार जवाब चाहूँगा :- क्या आप सदैव अपनी इंटीलेक्चुएलटीज या गुरुडम लादे लादे थकते नहीं ?

क्या आप का मन कभी किसी भी व्यवस्था के लिए खीज कर नहीं कहता
............................................

"उतार फेंक अपने तन मन पे ओढे सारे भार ,
नीचे हो हरी धरती ,ऊपर अनंत नीला आकाश,
भर सीने में सुबू की महकती शबनमी हवाएं ,
जोर-जोर से चिल्लाएं " हे हो , हे हो ,हे हो ",
,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,
फिर सुनते रहें गूंज अनुगूँज और प्रति गूंज||"

मेरा तो करता है : और मैं कर भी डालता हूँ

इसे अवश्य पढें " धार्मिकता एवं सम्प्रदायिकता का अन्तर " और पढ़ कर अपनी शंकाएँ उठायें ;
इस के साथ कुछ और भी है पर है सारगर्भित
बीच में एक लम्बा अरसा अव्यवस्थित रहा , परिवार में और खानदान में कई मौतें देखीं कई दोस्त खो दिये ;बस किसी तरीके से सम्हलने की जद्दोजहद जारी है देखें :---
" शब्द नित्य है या अनित्य?? "
बताईयेगा कितना सफल रहा |
हाँ मेरे सवाल का ज़वाब यदि आप खुले - आम देना न चाहें तो मेरे इ -मेल पर दे सकते है , ,पर दें जरुर !!!!



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